जैसा कि बोर्ड पर लिखा हुआ है यह वह मुबारक पेड़ है जिसके साये मे #हज़रत_मोहम्मदﷺ ने "पनाह" ली ओर #आराम_मुबारक किया था..इसका साया #ठंडा है ओर इसकी #हवाएँ सिर्फ #पेड़_के_फ़ासले तक ही महदूद है..❤
(आला हजरत का तर्जुमान ए कुरान कन्ज़ुल ईमान कि खुसुसियात ) जैसा कि पिछली पोस्ट मे हमने बताया कि कुरान को दुसरी जुबानो मे ट्रान्सलेट ( तर्जुमा ) करने के दौ उसलुब यानी तरीके है एक हर लफ्ज़ के निचे उसका तर्जुमा यानी मतलब लिख दिया जाता है ( इसके बारे मे हम पिछली पोस्ट मे लिख चुके है ) अब दुसरा तरीका ये होता है कि कुरान कि आयत को मुहावरो मे ट्रान्सलेट करना यानी लफ्ज़ो के तर्जुमे को आगे पिछे करके पुरा एक वाक्य बनाना जैसे what is your name तुम्हारा नाम क्या है ,, तो इस तरह का तर्जुमा तो सभी ने किया लेकिन आला हजरत ने जो मुहावरी तर्जुमा किया है वो ऐसा कमाल का किया है जिसमे लफ्ज़ी तर्जुमा भी आ जाता है पुरी इबारत का वाक्य भी समझ आ जाता है और फलसफा भी समझ आ जाता दुसरो के तर्जुमे को समझने के लिये बङी तफसिर दरकार होती है लेकिन आला हजरत के तर्जुमे का आलम ये है कि खालिस तर्जुमे से ही रब्त हुस्न ब्यान हुक्म फलसफा जो़क अदब सबकुछ मिल जाता है आईये आपको एक आयत का खुबसुरत मन्ज़र बताऊ आयत ये है 👇👇 وَ اِذَا خَلَوۡا عَضُّوۡا عَلَیۡکُمُ الۡاَنَامِلَ مِ...
(नबीयो ,वलियो स्वालेहीनो के कदम जहा लगे वहा से बरकत हासिल करना) हजरत अनस बिन मालिक रज़ियल्लाहु अन्हु ने फरमाया कि उन्हे हजरत अतबान बिन मालिक रज़ियल्लाहु अन्हु ने बताया कि वो नाबिना हो गये उन्होने नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैह व सल्लम को पैगाम भिजवाया कि या रसूल्ल्लाहा आप मेरे पास तशरीफ लाए और मेरे घर मे नमाज़ अदा फरमाए ताकि मै उस जगह को नमाज़ पढने कि जगह बना लु फिर नबी ए करीम अपने अस्हाब के साथ तशरीफ लाए और आप नमाज़ अदा फरमा रहे थे और आपके साथी बाते कर रहे थे,,( ईला आखिरही फिल हदीस ,) हदीस और बङी है हमने आधी ही लिखी है क्योकि इसमे फिर दुसरा मजमुन और है ,,जिसको पुरी हदीस पढना है वो मुस्लिम शरीफ हदीस नम्बर 149 देखे खैर सुनो इस हदीस से पता चला कि नबीयो औलिया बुजुर्गो ने जहा इबादत कि उस जगह को हुसुल ए बरकत बनाना सहाबा कि सुन्नत है अगर ऐसा ना होता तो हुजुर अलहीस्सलाम उन सहाबी से फरमाते कि मेरी उम्मत के लिये सारी ज़मिन मस्जिद बना दी गयी है तुम जहा चाहो अपने घर मे नमाज़ अदा फरमा लो इस हदीस कि शराह मे ईमाम नववी ,ईमाम इब्ने हजर अस्कलानी और दिगर शाहीरीन ए हदीस ने ...
#आराईं कौन कौन हैं ? आराईं एक ज़ात ( caste ) है इस ज़ात के लोग भारत पाक में कसीरा तादाद में रहते हैं आले ज़ोरईंन कि आमद 1200 क़ब्ल अज़ मसीह है ऐन या राईन मुहिब्बुल अदया यानी कहतानी उन नस्ल खानदान बनी बनू हमीर के एक उलुल अज़्म और बा हिम्मत शहज़ादे मसर्रत ज़ियादुल जहूर की औलाद से हैं ये खानदान यमन में बादशाही करता था बनू हमीर कहतान से सातवीं पुश्त में था कहतान के बेटे का नाम बअसर था जो हज़रत इब्राहीम का हम असर था प्रीम ने जब एक कलआ ज्बले ज़ोरईन तामीर किया तो उसका नाम प्रीम ज़ोरईंन पड़ गया प्रीम ज़ोरईन को आराईं का मोरिस ए आला तसव्वुर किया जाता है इसी वजा से इन्हें आले ज़ोरईन भी कहा जाता है प्रीम ज़ोरईन की औलाद से हज़रत सहाबिये रसूल अलैहिस्सस्लाम हज़रत नोमान ज़ोरईन हैं जिन्होंने 632 ईसबी में हज़रत रसूले पाक का दावत नामा पढ़ कर इस्लाम कुबूल कर लिया था कुछ रिवायात के हिसाब से आराईं क़ौम का शजरा हज़रत फ़ारूके आज़म से मिलता है इसी निसबत से कुछ आराईं फ़ारूक़ी भी कहलाते हैं आराईं वो अफ़राद हैं जो इस्लामी जंगो में झंडों की हिफाज़त पे मामूर होते थे इस फतेह के निशान वाले झंडे का नाम आराइया होता था आराईं क़बीले के मश...
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